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हार्दिक पांड्या को तो  अपने हिस्से की सजा मिल गयी क्या हम सब अपने हिस्से की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं?

हार्दिक पांड्या को तो अपने हिस्से की सजा मिल गयी क्या हम सब अपने हिस्से की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं?

“शब्द संभाल के बोलिये, शब्द के हाँथ न पाँव रे
एक शब्द औषद करे, एक शब्द करे घाव रे “

यह पंक्तियाँ सबसे ज्यादा किसी के बारे में याद दिलाती है तो वो है के.एल. राहुल और हार्दिक पांड्या. जिन्होंने ‘कॉफ़ी विथ करण’ में कुछ ऐसा कहा जो शायद नहीं कहते तो आज परिस्थितियाँ कुछ और होती.

लेकिन फ़कत ये हो न सका.

लेकिन ये बात सिर्फ हार्दिक पांड्या या राहुल की नहीं है ये बात हिन्दोस्तान के हर मर्द पर लागू होती है. यह सब हमारे बचपन से आरम्भ हो जाता है. जहाँ हमको इंग्लिश टेन्सेस पढ़ाते समय सिखाया जाता है कि, “राम फुटबाल खेलता है” और “सीता खाना बनती है”.

आप सब सोच रहें होंगे इस सबका हार्दिक पांड्या और राहुल विवाद से क्या लेना-देना है तो उसकी वजह यह है की हम सब जिस माहौल में बड़े हुए है वहाँ हममें से ज्यादातर लोगों को कभी सिखाया ही नहीं गया कि लैंगिक समानता क्या है या क्यों एक लड़के और लड़की को सामान अवसर मिले चाहिए. Gender Sensitization के लिए कभी प्रयास ही नहीं किए गए.

लेकिन क्या बात सिर्फ इतनी है सबसे भयावह तो यह है महिलाओं को सदियों से जिस निम्न व्यवहार का सामना कर पढ़ रहा है वह आज एक नॉर्म बन चूका है.

हार्दिक पांड्या ने कहा कि उनके कई महिलाओं से सम्बन्ध है जाहिर है इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन पांड्या ने जिस तरह बताया वह एक महिला में क्या देखते हैं और राहुल और पांड्या ने जिस तरह बताया कि मैच के बाद उन्होंने अपनी कई महिला प्रशंसक के साथ मैच के बाद ‘कनेक्ट’ किया है.

आप अपने ओहदे का प्रयोग किस लिए कर रहे है यह आपके बारे में बहुत कुछ ज़ाहिर कर देता है.

शायद पहले सब नार्मल होता कि आप महिलाओं के लिए कुछ भी बोल दो वो सब सह लेंगी लेकिन अब भारत अब बदल रहा है, #metoo अभियान ने जिस तरह से महिलाओं को बोलने का साहस दिया है, सब महिलाएं अपने कहानी , वह कहानी जो सब कब से जबान पर आना चाहती थी, बता रही है. हम मर्द सिर्फ सर झुकाकर सुन सकते है. और इसमें हर मर्द दोषी है वह जो किसी तरह से इस सब में शामिल नहीं रहा वह भी. क्योंकि उसने कभी अपने दोस्तों को महिलाओं पर आपत्तिजनक कमेंट करने से रोका नहीं.

“कॉफ़ी विथ करण” के एपिसोड के बाद पूरे भारत में जिस तरह से पांड्या और राहुल का विरोध हुआ वह एक नए भारत के भविष्य के तरफ इशारा करता है.

औए पांड्या और राहुल को उनक किए की सजा मिली. दोनों को ऑस्ट्रेलिया सीरीज से वापिस बुला लिया गया. दोनों ने अपनी गलती मानते हुए माफ़ी मांग ली है लेकिन यहाँ माफ़ी माँगने से ज्यादा जरुरी यह है कि दोनों का महिलायों के प्रति दृष्टिकोण बदले.

गांधी जी ने कहा है, “hate the sin, not the sinner”.

अब बात आती है हमारी. हमने जिस तरह से पांड्या और राहुल को सोशल मीडिया पर विरोध किया वो भी बिना अपने अंदर झाकें हुए. ये “holier than thou” वाला दृष्टिकोण बेवकूफी और दिखावे से से ज्यादा कुछ भी नहीं.

हार्दिक पांड्या और राहुल को फूहड़ इंटरव्यू देने की सजा मिली. वक़्त के साथ शायद दोनों पर से ये दाग मिट भी जाए. लेकिन भारत के और मर्दों का जो महिलाओं के प्रति जो नजरिया है वो कभी बदल पायेगा?

लेकिन फिर भी मुझे उम्मीद है कल एक नई सुबह होगी एक नया सूर्योदय होगा बस शर्त एक ही है हम सबको सुबह जल्दी उठना होगा.

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